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तृणमूल में लौटने के बाद दीपेंदु बिस्वास ने भावुक होते हुए कहा कि एक खिलाड़ी होने के नाते संघर्ष उनका स्वभाव रहा है
कोलकाता। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। इसी क्रम में रविवार को बसीरहाट दक्षिण के पूर्व विधायक और भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के पूर्व स्ट्राइकर दीपेंदु बिस्वास ने औपचारिक रूप से तृणमूल में वापसी कर ली। उनके साथ बसीरहाट-1 ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कादेर सरदार और बसीरहाट नगरपालिका के पूर्व उपाध्यक्ष पार्थसारथी बोस ने भी सत्तारूढ़ दल का झंडा थाम लिया।
दीपेंदु ने अपनी घर वापसी के बाद स्वीकार किया कि भाजपा में शामिल होना उनके जीवन की एक बड़ी भूल थी और अब वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य की विकास यात्रा का पुन: हिस्सा बनना चाहते हैं। दीपेंदु बिस्वास का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2016 में उन्होंने तृणमूल के टिकट पर बसीरहाट दक्षिण से जीत हासिल की थी। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काटकर डॉ. सप्तर्षि बंद्योपाध्याय को उम्मीदवार बना दिया था।
इस फैसले से क्षुब्ध होकर दीपेंदु तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष की उपस्थिति में भगवा खेमे में शामिल हो गए थे। हालांकि, भाजपा में भी उन्हें चुनावी मैदान में उतरने का अवसर नहीं मिला, जिससे कुछ ही समय में उनका मोहभंग हो गया। दीपेंदु ने काफी समय पहले ही भाजपा से इस्तीफा दे दिया था और लंबे समय से तृणमूल में वापसी के लिए प्रयासरत थे। तृणमूल में लौटने के बाद दीपेंदु बिस्वास ने भावुक होते हुए कहा कि एक खिलाड़ी होने के नाते संघर्ष उनका स्वभाव रहा है। उन्होंने भाजपा में जाने के फैसले को अभिमान में लिया गया गलत निर्णय बताया। दीपेंदु ने कहा कि मेरा उद्देश्य केवल विकास और सांप्रदायिक ताकतों को रोकना है। बसीरहाट के लोग जानते हैं कि मैंने विधायक रहते हुए क्या कार्य किए हैं। आगामी चुनावों में उम्मीदवारी के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी पद या टिकट के लालच में नहीं आए हैं, बल्कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे एक निष्ठावान सैनिक की तरह निभाएंगे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दीपेंदु बिस्वास की वापसी और उनके साथ स्थानीय कांग्रेस व अन्य नेताओं के जुडऩे से उत्तर 24 परगना जिले, विशेषकर बसीरहाट में तृणमूल की संगठनात्मक शक्ति में इजाफा होगा। इसी दिन दक्षिण 24 परगना में प्रतीक उर रहमान जैसे युवा नेताओं के शामिल होने से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव से पहले विपक्षी दलों के मजबूत चेहरों को अपने पाले में कर रही है। दीपेंदु की वापसी ने यह भी संदेश दिया है कि भाजपा में गए पुराने कार्यकर्ता अब पुन: अपनी पुरानी जड़ों की ओर लौट रहे हैं।